KESHAV & SHARMA JI : लड़कियां झूठ नहीं बोलती

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Dr. G.Singh

केशव :  अरे शर्मा जी  यह लठ लेकर  कहाँ जा रहे हैं

शर्मा : केशव जी आप भी आइये जरूरी काम है

केशव : शर्मा जी आप यहाँ आइये भीड़ मैं आपका कोई काम नहीं है

शर्मा : लीजिये आ गया अब बताइये

केशव : बैठिये और यह बताइये की यह भीड़ कहाँ जा रही है

शर्मा : मैं आपसे पहले भी बताया है न मोड़ पर खड़े हुए लड़के बदमाश हैं पर आप मानते कहाँ हैं

केशव : क्या कर दिया उन लड़कों ने

शर्मा : अपने मोहित की बिटिया नीना को किसी ने छेड़ा है

केशव : आपसे किसने कहा

शर्मा : नीना ने

केशव : कब की बात है यह

शर्मा : यही कोई 10 या 15 मिनट पहले की

केशव : मैं यहाँ सुबह से बैठा हूँ मैंने तो नीना को इस तरफ आते जाते नहीं देखा

शर्मा : आपका ध्यान अख़बार मैं होगा वरना नीना झूठ क्यों बोलेगी

केशव : यह सही है की मैं अखबार पढ़ रहा था पर इतना डूबा हुआ भी नहीं था आस पास का ध्यान ही न रहे
केशव : फिर नीना जब भी इधर से गुजरती है नमस्ते बुला कर ही जाती है | आज तो मैंने नमस्ते नहीं सुनी

शर्मा : अरे परन्तु नीना झूठ क्यों बोलेगी

केशव : नीना के झूठ बोलने के तो कई कारण हो सकते हैं

शर्मा : जैसे की

केशव : स्कूल मैं किसी से झगड़ा | बदला लेने के लिए झूठ बोल दिया हो

शर्मा : कैसी बात करते हैं केशव जी नीना शरीफ घर की लड़की है

केशव : नीना मोहित की लड़की है न

शर्मा : हां

केशव : अभी कुछ दिन पहले ही तो आप कह रहे थे की मोहित और उसका लड़का बहुत झूठ बोलते हैं

शर्मा : बिलकुल दोनों एक नंबर के झूठे हैं

केशव : नीना उसी परिवार की लड़की है तो वह झूठ क्यों नहीं बोल सकती

शर्मा : अरे वह लड़की है

केशव : तो क्या लड़की होना झूठ नहीं बोलने का प्रमाण पत्र है

शर्मा : संस्कार

केशव : संस्कार तो नीना को वही मिले होंगे जो मोहित और उसकी पत्नी मैं होंगे | वही संस्कार  मोहित के लड़के को भी मिले होंगे न | या नीना के लिए संस्कार कहीं और से खरीद कर लाये गए | जब मोहित का लड़का झूठ बोल सकता है तो उसी संस्कारों मैं पाली नीना क्यों नहीं

शर्मा : आपसे तो बहस करना ही बेकार है

केशव : नीना और उसके भाई मैं एक जैसे संस्कार है एक ही DNA है फिर आप एक को झूठों का बादशाह और दूसरे को सच्चों की रानी कैसे मान रहे हैं

शर्मा : बात तो आपकी ठीक ही है परन्तु

केशव : इस परन्तु को छोड़िये और इस पागलपन से बाहर निकलिए की लड़कियां झूठ नहीं बोलती

शर्मा : कैसे निकलें बहार

केशव : अपने बच्चों को यह सिखाइये की लड़के और लड़की मैं कोई फरक नहीं जितनी अच्छाई लड़कों मैं है उतनी ही लड़कियों मैं | ना कम ना ज्यादा  ताकि अगली जनरेशन तो सही सोचने के काबिल बन सके

शर्मा : ठीक कहा आपने

केशव : चलिए फिर इसी बात पर एक कप चाय हो जाये

शर्मा : क्या लड़कों को बचाने नहीं चलना चाहिए हम लोगों को

केशव : नहीं बच्चे समर्थ है | अगर विश्वास न हो तो 29 अप्रैल 2017 को जंतर मंतर, दिल्ली पर जा कर देखिये | वह देखिये मोहल्ले वाले अपना सा मुँह ले कर वापिस आ रहे हैं

शर्मा : तो क्या आप मोहल्ले वालों को समझने की कोशिश नहीं करेंगे

केशव : नहीं शर्मा जी आप तो अपने है इस लिए आपसे बहस कर लेता हूँ | भीड़ को नहीं समझाया जा सकता

शर्मा : फिर भी कोशिश तो करनी ही चाहिए

केशव : बिलकुल कर रहा हूँ ना | देखिये मैंने आपको समझाया आप अपने घर पर समझाइये और दोस्तों को | इस तरह से ही जागरूकता आएगी

शर्मा : ठीक कहा आपने

 

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