एक गलत फैसला

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रमन राणा

बाजार की इस भीड़ में वो कदम बढ़ाए जा रही थी,

मुरझाई सी आंखें उसकी मानो सब हालात बताए जा रही थी,

एक मोड पर उससे मेरा आमनासामना भी हो गया,

मैंने पूछा कैसी हो तो बस सिर झुकाए जा रही थी।

 

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