KESHAV & SHARMA JI : WILD ANIMALS (जंगली जानवर)

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Dr. G.Singh

शर्मा : आइये केशव जी
केशव : कहिये शर्मा जी
शर्मा : केशव जी यह बताइये की रंजन और बबिता के झगडे का क्या करना चाहिए
केशव : शर्मा जी यह उनका निजी मामला है
शर्मा : आपकी कोई राय तो होगी ना
केशव : आपको एक किस्सा सुनाता हूँ
शर्मा : सुनाइए
केशव : हा तो शर्मा जी यह किस्सा है आज से बहुत साल पहले का एक जंगल मैं 2 भेड़िये रहते थे एक का नाम था रामलाल दूसरे का नाम था बसंती  
शर्मा : यह क्या बात हुई भेड़ियों के भी भला नाम होते हैं
केशव : आपके कुत्ते का क्या नाम है
शर्मा : शेरू
केशव : तो मैंने भेड़ियों के नाम रख दिए तो कोनसा गुनाह कर दिया
शर्मा : हा हा हा
केशव : रामलाल  और बसंती एक छोटी सी गुफा मैं रहते थे | एक दिन दोनों मैं लड़ाई हो गयी | दोनों ने एक दूसरे को गलियां दे डाली
शर्मा : अच्छा, गलियां इंसानों वाली दी या भेड़ियों वाली |
केशव : रात भर दोनों मुँह फुला कर बैठे रहे न ढंग से सोये न खाया पिया
शर्मा : दूसरे भेड़ियों ने समझौते की कोशिश नहीं की
केशव : बिलकुल की पर बात नहीं बनी | भेड़ियों ने सोचा 2 या 4 दिन मैं सुलह हो ही जाएगी अभी अकेले छोड़ दिया जाये
शर्मा : फिर हुई सुलह
केशव : हा हो गयी | पर कुछ दिन बाद फिर झगड़ा हो गया
शर्मा : इस बार किस मुद्दे पर हुआ
केशव : शर्मा जी मुद्दा मायने नहीं रखता झगड़ा हुआ यह मायने रखता है | धीरे धीरे दोनों की आदत हो गयी झगड़ा करने की | झगड़ा इतना बाद गया की दोनों एक दूसरे को नाखूनों एंड दातों से काटने लग गए
शर्मा : इतना जबरदस्त झगड़ा मुद्दा कोई खास ही होगा
केशव : नहीं शर्मा जी फिर बताता हूँ मुद्दा मायने नहीं रखता
शर्मा : ठीक
केशव : लोगों ने समझाया की जंगल बहुत बड़ा हैं आस पास बहुत सारी गुफाएं खाली है अलगअलग रहना शुरू कर दे
शर्मा : तो क्या दोनों अलग हो गए
केशव : कहाँ शर्मा जी दोनों लड़ते रहे एक दूसरे को काटते रहे जख्मी करते रहे पर अलग नहीं हुए
शर्मा : पर ऐसा क्यों जब ऑप्शन था तो शांति से अलग क्यों नहीं हो गए
केशव : क्योंकि वह जंगली जानवर थे ना
शर्मा : यह क्या बात हुई
केशव : शर्मा जी बात तो यही है अगर आप समझ सकें तो
शर्मा : हम लोग रंजन और बबिता के झगडे  की बात कर रहे थे
केशव : बिलकुल
शर्मा : आप भेड़ियों का किस्सा सुनाने लग गए
केशव : बिलकुल
शर्मा : आप कहना कहते हैं की रंजन और बबिता भेड़ियों की तरह लड़ रहे हैं
केशव : बिलकुल दोनों जानवरों की तरह लड़ रहे हैं
शर्मा : ऐसा क्यों
केशव : आप सोचिये
शर्मा : क्योंकि दोनों के विचार अलग अलग हैं दोनों की नहीं बनती
केशव : बिलकुल सही
शर्मा : और दोनों अलग होने को भी तैयार  नहीं है
केशव : बिलकुल सही
शर्मा : इसका मतलब दोनों को तलाक ले लेना चाहिए
केशव : बिलकुल
शर्मा : पर वह लेंगे नहीं
केशव : क्यों
शर्मा : संस्कार तथा संस्कृति allow नहीं कर रहे
केशव : बिलकुल सही | दरअसल दोनों आने वाले कल के लिए तैयार ही नहीं हैं | दोनों गुजरे कल मैं जी रहे हैं |
शर्मा : तो क्यों ना हम समझने की कोशिश करें
केशव : कोशिश की जा सकती है पर फायदा होने की सम्भावना नहीं है
शर्मा : क्यों
केशव : आप जिसे संस्कार कह रहे थे वह एक दिन मैं या समझने से नहीं आते | उसके लिए बचपन से माँ बाप नीव डाल देते हैं
शर्मा : आप कहना कहते हैं की बचपन से ही बच्चों की तलाक के बारे मैं सीखना सुरु कर दें
केशव : नहीं बचपन से बच्चों को आत्मनिर्भर बनने की तथा आने वाले कल के लिए तैयार रहें की शिक्षा देना शुरू कर दें
शर्मा : ठीक कहा आपने केशव जी वक़्त हमेशा आगे बढ़ता है | इस लिए अगली जनरेशन अपनी जिंदगी अच्छे से गुजरे उसकी तयारी हमे आज से ही करवानी होगी
केशव : बिलकुल और दो बातें  हमेशा याद रखिये | पहली हमारी अगली जनरेशन के लिए जरूरी नहीं की हमारे संस्कार सही हो उनको अपने वक़्त एंड जरूरत के मुताबिक जीना है | और दूसरी मोगली अगर हमारे मोहले मैं आकर रहने लगे तो उसे हमारे जैसे कपडे पहनने होंगे हमारी तरह जीना होगा वर्ण वह जंगली जानवर ही बना रहेगा

शर्मा : कौन मोगली
केशव : अपने JUNGLE BOOK वाला

शर्मा : हा हा हा | तो रंजन और बाबियता का क्या
केशव : चलिए उन्हें समझने की कोशिश करते हैं

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