KESHAV & SHARMA JI : JUDGMENTS

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Dr. G.Singh

 

केशव : आइये शर्मा जी
शर्मा : केशव जी यह अपने नारायण दत्त है इनको आपकी मदद चाहिए
केशव : बताइये नारायण जी
नारायण : केशव जी मेरा दहेज़ का केस चल रहा है और मैं ज्यादा से ज्यादा judgments लगाना चाहता  हूँ 20 मेरे पास है अगर आप 20 और बता सकें तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी
केशव : नारायण जी आप कहते है की ज्यादा judgments लगाए जाये अच्छी बात है मैं आपकी मदद करूंगा पर पहले आपको एक राय  देना चाहूंगा  
नारायण : जी जरूर
केशव : आपके केस मैं judgment देने वाला एक इंसान है
नारायण : जाहिर है
केशव : इंसानी फितरत है मुश्किल से भागना
नारायण : आप कहना क्या कहते हैं
केशव : आपको अपना केस सिंपल रखना चाहिए जज को लगना चाहिए की आपका केस सिंपल और सीधा साधा है अगर उसे लगा की आपका केस बहुत complicated है तो सबसे पहले जज अपनी गर्दन बचाएगा
नारायण : बात तो आपकी ठीक है पर यह होगा कैसे
केशव : मेरे विचार से 2 बातों का ध्यान रखिये पहली आपके arguments सटीक पर सिंपल होने चाहिए दूसरी judgments ज्यादा नहीं बल्कि जहां जरूरी हैं वही होने चाहिए
नारायण :  आपका मतलब है ज्यादा judgments न लगाऊं
केशव : मेरा मतलब है की जहां जरूरी हो वही लगाइये और केस merit के दम पर लड़िये
नारायण : यह आपकी अपनी राय है
केशव : यह मेरा अपना एक्सपीरियंस है
नारायण : आपने अपने केस मैं कितने judgments लगाए थे
केशव : एक भी नहीं
नारायण : ओह | मैं आपकी राय पर विचार करूंगा

 

NOTE : Based on True Incident

 

DAMAN WELFARE SOCIETY

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