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परिवार

September 29, 2017 gursharn 0

परिवार अब कहाँ ,परिवार तो कब के मर गए। आज जो है,वह उसका केवल टुकड़ा भर रह गए । पहले होता था दादा का , […]

मर्द-ए-ज़िगर

April 25, 2017 gursharn 6

अभय (ज़ख्मी मर्द) जमाने ने कह दिया मर्द को दर्दः नहीं होता और मर्द भी चुप बेठ गया अपने ग़मो को समेट कर ज़माना डरता […]

Be A Men

April 14, 2017 gursharn 0

A MEN बहुत थक सा गया हूँ खुद को यू निर्दोष साबित करते करते….  शायद आदमी होने की सज़ा कटती है कटतेे कटते यूँ तो […]

एक गलत फैसला

April 13, 2017 gursharn 0

रमन राणा बाजार की इस भीड़ में वो कदम बढ़ाए जा रही थी, मुरझाई सी आंखें उसकी मानो सब हालात बताए जा रही थी, एक […]